Saturday, March 7, 2026

देश हमे देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे

 

देश हमे देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखे ॥धृ॥

सूरज हमे रोशनी देता, हवा नया जीवन देती है
भूख मिटाने को हम सब की, धरती पर होती खेती है
औरों का भी हित हो जिसमे,
हम ऐसा कुछ करना सीखे ॥१॥

गरमी की तपती दुपहर मे, पेड सदा देते है छाया
सुमन सुगन्ध सदा देते है, हम सबको फूलों की माला
त्यागी तरुओं के जीवन से
हम परहित कुछ करना सीखे ॥२॥

जो अनपढ है उन्हे पढ़ाए, जो चुप है उनको वाणी दे
पिछड गये जो उन्हे बढाये, समरसता का भाव जगा दे
हम मेहनत के दीप जलाकर,
नया उजाला करना सीखे ॥३॥

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