Tuesday, June 9, 2026

राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्

 

राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्

राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वंदे मातरम् ।धृ |


बंसी के बजते स्वरों का प्राण वंदे मातरम्

झल्लरी झनकार झनके नाद वंदे मातरम्

शंख के संघोष का संदेश वंदे मातरम् ॥१॥


सृष्टि के बीज मंत्र का है मर्म वंदे मातरम्

राम के वनवास का है काव्य वंदे मातरम्

दिव्य गीता ज्ञान का संदेश वंदे मातरम् ॥२॥


हल्दी घाटी के कणों में व्याप्त वंदे मातरम्

दिव्य जौहर ज्वाल का है तेज वंदे मातरम्

वीरों के बलिदान की हुंकार वंदे मातरम् ॥३॥


जन-जन के हर कंठ का हो गान वंदे मातरम्

शत्रु थरथर कांपे सुनकर नाद वंदे मातरम्

वीर पुत्रों की अमर ललकार वंदे मातरम् ॥४॥

Thursday, May 7, 2026

चलो भाई चलो शाखा मे चलो


चलो भाई चलो शाखा मे चलो
थोडी देर अब तुम सब काम भुलो
चलो भाई चलो संग संग चलो
आज के दिन ज़रा हंसो और खेलो ॥धृ॥

राम कृष्ण के वारिस हम
गर्व से कहते हिन्दु हम
भग्वा ध्वज है पुज्य परम
वन्दन उसे करो संग संग चलो ॥1॥

छोटे छोटे बच्चे हम
काम बडा करेंगे हम
धर्म की रक्षा करेंगे हम
कहेंगे वन्दे मातरम ॥2॥

शाखा मे है REAL FUN
कबड्डि खो खो मे रम्ता मन
करो योगा भुलो गम
कदम मिलओ और संग संग चलो ॥3॥

जीना है तो गरजे जग में, हिन्दू हम सब एक


जीना है तो गरजे जग में, हिन्दू हम सब एक
उलझे सुलझे प्रश्नों का है, उत्तर केवल एक ॥धृ॥

केशव के चिंतन दर्शन ने, संगठना का मंत्र सिखाया
आजीवन अविराम साधना, तिल तिल कर सर्वस्व चढ़ाया
एक दीप से जला दूसरा, जलते दीप अनेक ॥1॥

भाषा भूषा मतवालों की, बहुरंगी यह परम्परा
सर्व पंथ समभाव सिखाती, ऋषि-मुनियों की दिव्य धरा
इन्द्रधनुष की छटा स्त्रोत में, शुभ रंग है एक ॥2॥

स्नेह समर्पण त्याग हृदय में, सभी दिशा में लायेंगे
समता की नवजीवन रचना, हम सबको अपनायेंगे
आज समय की यही चुनौती, भूले भेद अनेक ॥3॥

Saturday, March 28, 2026

संघ किरण घर घर देने को अगणित नंदादीप जले,

 

संघ किरण घर घर देने को अगणित नंदादीप जले,
मौन तपस्वी साधक बन कर हिमगिरि से चुपचाप गले ॥धृ॥

नई चेतना का स्वर दे कर जनमानस को नया मोड दे,
साहस शौर्य हृदय मे भर कर नयी शक्ति का नया छोर दे,
संघशक्ति के महा घोष से असुरो का संसार दले ॥१॥


परहित का आदर्श धार कर परपीडा को ह्रिदय हार दे,
निश्चल निर्मल मन से सब को ममता का अक्षय दुलार दे,
निशा निराशा के सागर मे बन आशा के कमल खिले ॥२॥

जन मन भावुक भाव भक्ति है परंपरा का मान यहा,
भारत माँ के पदकमलो का गाते गौरव गान यहा,
सब के सुख दुख मे समरस हो संघ मन्त्र के भाव पले ॥3॥


 

Saturday, March 7, 2026

दुर्लभ जन्म मिला भारत में, धन्य-धन्य अपना जीवन

 

दुर्लभ जन्म मिला भारत में,
धन्य-धन्य अपना जीवन, करें साधना और सघन,
करें साधना और गहन । || धृ ||

ज्ञानशील के पावन पथ पर, हो निर्भय बढ़ते जाएं,
व्यक्ति व्यक्ति का हृदय जीतकर,
सुगठित शक्ति प्रकटाए,
गूंज उठेंगे धरा गगन || 1 ||

निज गुणवत्ता और निखारे, राष्ट्र समर्पित भाव प्रबल,
कर्म तपस्या चले निरंतर, व्यर्थ न जाए कोई पल,
सजग रहे और करें मनन, || 2 ||

कोई कष्ट चुनौती आए, शुभ अवसर में बदलेंगे,
पद लिप्सा मिथ्या आकर्षण,
हम न कभी भी फिसलेंगे,
रहे सदा निर्लिप्त प्रसन्न, || 3 ||

मर्द आम्हीच हिंदू खरे, दुश्मनाना भरे कापरे

 

मर्द आम्हीच हिंदू खरे, दुश्मनाना भरे कापरे
देश रक्षाव्या, धर्म तारव्या
कोण झुंझात मागे उरे || धृ ||

भारता आम्ही तुलाच देव मानतो
हाच हिंदू धर्म एक जाणतो
सांगतो महान आमुची परंपरा
रक्त शिंपूनी पवित्र ठेवितो धरा
याच भूमीवरी, प्राण गेला तरी
आमुची वीरगाथा उरे || 1 ||

व्हा पुढे आम्हा धनाजी बाजी सांगती
मर्द हो उठा कडाडतात नौबती
राजपूत कधी ना संगरातूनी हटे
मारुनी दहास एक मराठे कटे
सिंधु ओलांडूनी धावती संगिनी
पाय आता न मागे सरे || 2 ||

वादळापरी आम्ही पुढेच चालतो
जय शिवाजी गर्जुनी रणात झुंझतो
घोष दुमदुमे हा पुन्हा दिगंतरी
पूर्वाजा परी अजिंक्य दिव्य संगीरी
घेऊ शत्रूवरी झेप वाघापरी
मृत्यू आम्हा पुढे घाबरे ||
3 ||

मातृभुमि गान से गूंजता रहे गगन

 

मातृभुमि गान से गूंजता रहे गगन
स्नेह नीर से सदा फुलते रहे सुमन ॥।धृ।
जन्मसिद्ध भावना स्वदेश का विचार हो
रोम रोम मे रमा स्वधर्म संस्कार हो
आरती उतारते प्राणदीप हो मगन,
स्नेह नीर से सदा फुलते रहे सुमन ॥१॥

हार के सुसुत्र मे मोतियों की पंक्तियाँ
ग्राम, नगर, प्रांत से संगठित शक्तीयाँ
लक्ष लक्ष रुप से राष्ट्र हो विराट तन
स्नेह नीर से सदा फुलते रहे सुमन ॥२॥

ऎक्य शक्ति देश की प्रगति मे समर्थ हो
धर्म आसरा लिये मोक्ष काम अर्थ हो
पूण्यभुमी आज फिर ज्ञान का बने सदन
स्नेह नीर से सदा फुलते रहे सुमन ॥३॥