Saturday, March 7, 2026

अब जाग उठो कमर कसो

 

अब जाग उठो कमर कसो
मंजिल की राह बुलाती है
ललकार रही हमको दुनिया
बेरी आवाज लगाती है || ध्रु ||


है ध्येय हमारा दूर सही
पर साहस भी तो क्या कम है
हम राह अनेकों साथी है
कदमों में अंगद का दम है
असूरों की लंका राख़ करें
वह आग लगाने आती है || 1 ||

पग पग पर कांटे बिछे हुवे
व्यवहार कुशलता हममे हैं
विश्वास विजय का अटल लिए
निष्ठा कर्मठता हममे हैं
विजयी पुरखों की परंपरा
अनमोल हमारी थाती है || 2 ||


हम शेर शिवा के अनुगामी
राणा प्रताप की आन लिए
अर्जुन का शरसंधान लिए
संगठन तंत्र की शक्ति ही
वैभव का चित्र सजाती है || 3 ||

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