गलत मत कदम उठाओ
सोच कर चलॊ, विचार कर चलो
राह की मुसीबतों को पार कर चलो, पार कर चलो ॥धृ॥
हम पे जिम्मेदारियां है देश की बडी,
हम न बदले अपनी चाल हर घडी – घडी
आग ले चलो, चिराग ले चलो
ये मस्तियों कि रंग भरे फाग ले चलो, फाग ले चलो || 1 ||
मंजिल के मुसाफिर तुझे क्या राह की फिकर,
चट्टान पर तूफान के झोंको का क्या असर,
ये कौन आ रहा, अंधेरा छा रहा
ये कौन मंजिलों पे मंजिले उठा रहा, मंजिले उठा रहा || 2 ||
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