Friday, July 3, 2026

चल तू अपनी राह पथिक चल

चल तू अपनी राह पथिक चल, होने दे होता है जो कुछ
उस होने का हो निर्णय क्या तुझको, तुझको तुझको
विजय पराजय से क्या || धृ ||

मेघ उमड़ते है SSS अंबर में,
भंवर उठ रहे है SSS सागर में
आँधी और तूफान डगर में, तुझको तो केवल चलना है
चलना ही है तो फिर भय क्या, तुझको SSS – 3 ||1||

अरे थक गया है क्यूँ बढ़ता चल,
उठ संघर्षों से लड़ता चल
जीवन विषम पंथ चलता चल,
खड़ा हिमालय हो यदि आगे
चढ़ूँ या लौटूँ यह संशय क्यूँ, तुझको SSS – 3 ||2||